देश के हर व्यक्ति को मिलेंगे 2600 रूपए बिना कोई काम किए

 

 

इंटरनैशनल मॉनिटरी फंड (IMF) का कहना है कि अगर भारत फूड और एनर्जी पर सब्सिडी समाप्त कर दें तो देश के प्रत्येक व्यक्ति को सालाना 2,600 रुपये की यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) दी जा सकती है।

आईएमएफ ने अपनी ‘फिस्कल मॉनिटर – टैकलिंग इनेक्वालिटी’ रिपोर्ट में यह बात कही है। अगर सरकार UBI अपनाने का फैसला लेती है, तो उसे देश में मौजूदा समय में चल रहे सब्स‍िडी पैकेज को लेकर विचार- विमर्श करना होगा। आईएमएफ के अनुसार नए सिरे से नीतियां बनानी होंगी। इतनी कम यूबीआइ देने का वित्तीय खर्च जीडीपी का 3 फीसदी होगा।

आईएमएफ का कहना है कि अगर सरकार खाने और ऊर्जा पर फि‍लहाल जो सब्‍सि‍डी दी जा रही है उसे हटा दे तो देश के हर नागरि‍क को सालाना 2600 रुपए की यूनि‍वर्सल बेसि‍क इनकम दी जा सकती है। यानी यह तो साफ है कि फूड पर एनर्जी पर दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म किया जा सकता है। इससे कमजोर वर्ग को काफी फायदा होगा। आईएमएफ ने इसके लिए 2016 की एक स्टडी का हवाला दिया है। आईएमएफ का कहना है कि इससे यूबीआई के लिए
फंड उपलब्ध हो सकेगा।

क्या होता है यूबीआई?
यूबीआई का मतलब होता है यूनिवर्सल बेसिक इनकम। यूनिवर्सल बेसिक इनकम वह आय होती है। जिसे सरकार या फिर किसी अन्य पब्लिक इंस्टीट्यूशन की तरफ से सोशल सिक्योरिटी की तरह दिया जाता है। यह आय व्यक्ति की अपनी आय से अलग होती है।

2011-12 के डेटा पर आधारित कैलक्युलेशन
यह कैलक्युलेशन 2011-12 के डेटा पर आधारित है और एनडीए सरकार के तहत फ्यूल सब्सिडी में आई भारी कमी और आधार के जरिए अन्य सब्सिडी के वितरण के मद्देनजर इस डेटा को समायोजित करने की जरूरत है। कैलकुलेशन के मुताबि‍क, इतना कम वेतन देने पर जो खर्च आएगा वो भी जीडीपी का 3 फीसदी के आसपास होगा मगर यह ईंधन और खाने पर दी जाने वाली सब्‍सि‍डी से तीन मोर्चों पर बेहतर साबि‍त होगी।

ऐसे लागू होगी ये व्यवस्था
आईएमएफ का मानना है कि सब्सिडी की मौजूदा व्यवस्था में कमियां हैं और इस वजह से इनका लाभ ऐसे वर्गों को पूरी तरह नहीं मिल पाता जो इसके हकदार हैं। यूबीआई को लागू करने से मिलने वाले संभावित फायदों के लिए राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों से निपटने की योजना सावधानी से बनाने की जरूरत होगी क्योंकि सब्सिडी व्यवस्था में सुधार के लिए बड़े स्तर पर कीमतों में वृद्धि करनी पड़ेगी। अब देखना यह होगा कि सरकार आखिर आईएमएफ की सलाह पर गौर करती भी है या नहीं।

 

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