जब देवानंद ने सुरैया से कहा था, ”उँगलियाँ फेरते हुए मेरे बाल मत बिगाड़िएगा”

 

आज बॉलीवुड के सदाबहार हीरो देवानंद का जन्मदिन है। देव आनंद का जन्म 26 सितंबर, 1923 को पंजाब के गुरदासपुर जिले में हुआ था। इस मौके पर उनकी ज़िन्दगी से जुड़े कुछ ऐसे फैक्ट्स आपको बताने जा रहे हैं जो आपने शायद ही सुने हो। आपको बता दें कि देवानंद की ज़िंदगी में एक महिला ऐसी भी आई थी, जिससे वो मोहब्बत करते थे। जी हाँ, वो नाम था – सुरैया। दोनों की पहली मुलाकात फ़िल्म ‘विद्या’ के सेट पर हुई थी। तब देवानंद ने अपना परिचय देते हुए सुरैया से कहा था, ”दुनिया मुझे देव कहती हैं। आप मुझे किस नाम से पुकारना पसंद करेंगी? तब सुरैया ने हँसते कहा था – ”देव।”

उस दौरान उनकी मुलाकात की बातचीत कुछ ऐसी थी। उस समय देवानंद साहब सुरैया की आँखों में देखते हुए अपनी चार्मिंग मुस्कान बिखेरी थी। तो सुरैया ने सवाल किया था, ”आप देख क्या रहे हैं?”
तो देवानंद साहब ने जवाब दिया-”आप के अंदर कुछ।”
सुरैया की उत्सुकता बढ़ गई, ”मेरे अंदर क्या?”
देवानंद ने कुछ इस अंदाज़ में जवाब दिया, ”यह मैं आपको बाद में बताउँगा।”

कुछ इस अंदाज़ में शॉट दिया
यह सब बातचीत चल ही रही थी कि इस बीच, डायरेक्टर ने कहा था,”सुरैया जी शॉट रेडी है। आपको गाते हुए देवानंद की कमर में अपनी बाहें डालते हुए उनके बालों में उँगलियाँ फेरनी हैं। तब देव ने सुरैया से कहा था, ”उँगलियाँ फेरते हुए मेरे बाल मत बिगाड़िएगा।”
सुरैया ने कहा – ”हाँ मुझे पता है। मैं आपकी ज़ुल्फ़ों को बिल्कुल नहीं छेड़ूँगी।” देवानंद अपनी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ़ में लिखते हैं, ”गाना चला, कैमरा रोल हुआ। सुरैया ने मुझको पीछे से आलिंगन में लिया। मैंने उनकी साँसों की गर्माहट महसूस की। मैंने उनके हाथों का चुंबन लेकर छोड़ दिया और फिर उनकी तरफ़ एक फ़्लाइंग किस उछाला।”सुरैया ने उनके हाथ के पीछे का हिस्सा चूम कर उसका जवाब दिया। निर्देशक ने चिल्ला कर कहा, ”ग्रेट शॉट”.
वहाँ पर मौजूद फ़ोटोग्राफ़र चिल्लाए, ”एक बार फिर उन्हें चूमिए।”

तब देवानंद ने सुरैया से पूछा। उन्होंने मुँह हिलाया। इस बार देवानंद ने उन्हें गालों पर चूमा। फ़ोटोग्राफ़र पागल हो गए। जब सुरैया को एकांत मिला जो उन्होंने कहा, ”तो आप कुछ कह रहे थे…. मेरे बारे में!” देवानंद ने फ़्लर्ट किया, ”मैं आपके भाव नहीं बढ़ाना चाहता।””लेकिन मैं अपने भाव बढ़ाना चाह रही हूँ”, सुरैया को इस छेड़छाड़ में मज़ा आने लगा था।”अगर मैं आपको बताऊँ कि मैं आपके बारे में क्या सोच रहा था तो क्या आप उस पर यकीन करेंगी ?”
सुरैया ने कहा, ”बिल्कुल।””आपकी आँखें एक रानी के चेहरे पर चमकते हुए हीरे की तरह हैं। लेकिन….”’लेकिन क्या ?”, सुरैया ने ज़ोर दिया। देवानंद ने कहा, ”आपकी नाक सुंदर तो है लेकिन थोड़ी लंबी है।” सुरैया ने अपनी नाक छुई और कहा, ”आप सही कहते हैं।”देवानंद ने बात आगे बढ़ाई, ”लेकिन यह आपके चेहरे पर सुंदर लगती है। ” ऐसे कई किस्से उनकी इस किताब में दर्ज़ है।

 

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