हैप्पी बर्थडे: आज से 45 साल पहले स्मिता पाटिल एंकरिंग के लिए जींस पहनकर जाती थीं, ऐसी थीं उनकी ज़िन्दगी

 

हिंदी सिनेमा की सबसे अलहदा और संवेदनशील अभिनेत्री स्मिता पाटिल का आज जन्मदिन होता है। अगर नियति और ईश्वर के किये के खिलाफ हमारा बस चलता तो स्मिता जिन्दा होती और वे अपना 62 वां जन्मदिन मनाती। महज 31 साल की उम्र में इस फानी दुनिया को छोड़ चली गई स्मिता आज भी सिनेमाप्रेमियों के दिलों पर राज़ करती है। यह कहने में बिलकुल भी अतिश्योक्ति नहीं है कि वे हिंदी सिनेमा की सबसे अलग और नायब कलाकार था। उनके जाने के बाद हिंदी सिनेमा पूरी तरह से अकेला पड़ गया था।

 

 

 

 

बताते चले कि जब भी हिंदी सिनेमा के संवेदनशील सिनेमा की बात होती है स्मिता हमारे ज़हन में अपने आप दस्तक देने लगती है। वे उस समय की सबसे बड़ी सितारा थीं और उनके जाने के बाद भी उनकी 14 फ़िल्में रिलीज हुईं। उनकी आखिरी सिनेमाई दस्तक की बात करें तो उन्होंने ”गलियों का बादशाह’ में अंतिम बार अपनी अपनी कलाकारी से लोगों का मनोरंजन किया था।

स्मिता ने अपने प्रभावशाली अभिनय से कमर्शियल और समानांतर सिनेमा समान प्रभाव से काम किया था। बॉलीवुड में जब भी संवेदनशील और प्रभावशाली अभिनय की बात होती है स्मिता का नाम हमेशा आदर से लिया जाता रहेगा।

 

उनका जन्म 17 अक्टूबर 1955 को पुणे शहर में हुआ था। उनके पिताजी शिवाजी राय पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री थे जबकि उनकी मां एक सोशलिस्ट थीं। अपने अभिनय से दर्शकों के बीच में एक आज भी ज़िंदा स्मिता महज 31 वर्ष की उम्र में 13 दिसंबर 1986 को इस दुनिया को अलविदा कहा।

डार्क सिनेमा की फील देने वाली स्मिता के बारे में कहा जाता है कि वे जब महज 16 साल की थीं तभी वो न्यूज रीडर की नौकरी करने लगी थीं। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि आज 45 साल पहले उन्होंने सामाजिक बंधनों की परवाह किये बगैर अपनी पसंद का पहनावा पहनती थीं। वे ख़बर पढने के लिए दूरदर्शन में जींस पहन कर जाया करती थीं। हालाँकि जब उन्हें न्यूज़ पढ़ना होता तो वो जींस के ऊपर से ही साड़ी लपेट लेतीं। लेकिन आज जब लड़कियों के पहनावे पर लोग कटाक्ष करते हैं तो हैरानी होती है।

 

श्याम बेनेगल ने दिया पहला ब्रेक


दूरदर्शन में एंकरिंग के दौरान उनकी मुलाकात जाने माने निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल से हुई। श्याम बेनेगल ने स्मिता की प्रतिभा को पहचान कर अपनी फ़िल्म ‘चरण दास चोर’ में एक छोटा सा किरदार दिया। इसके बाद तो उन्होंने अपने अभिनय से सिनेमाई हलकों में तहलका मचा दिया। 80 के दशक में स्मिता ने व्यावसायिक सिनेमा की ओर अपना रूख कर लिया। इसके अलावा उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन के साथ ‘नमक हलाल’ और ‘शक्ति’ में अभिनय किया। उनकी यह दोनों फ़िल्में कामयाब रहीं। इसके बाद 1985 में स्मिता पाटिल की फ़िल्म ‘मिर्च मसाला’ आई। इसी वर्ष उन्हें उनके सिनेमाई योगदान के लिए उन्हें पदमश्री से सम्मानित किया गया।

 

 

 

 

कई कीर्तिमान रचे


अपने एक दशक से भी छोटे से फ़िल्मी करियर में स्मिता पाटिल ने 80 से ज्यादा हिंदी और मराठी फ़िल्मों में अलग अलग भूमिकाएं की। जहाँ ताकि उनकी कुछ चर्चित फ़िल्में थीं – ‘निशान्त’, ‘चक्र’, ‘मंथन’, ‘भूमिका’, ‘गमन’, ‘आक्रोश’, ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’, ‘अर्थ’, ‘बाज़ार’, ‘मंडी’, ‘मिर्च मसाला’, ‘अर्धसत्य’, ‘शक्ति’, ‘नमक हलाल’, ‘अनोखा रिश्ता’ आदि। केतन मेहता की फ़िल्म ‘मिर्च-मसाला’ ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। उन्हें दो नेशनल अवार्ड्स और चार फिल्मफेयर अवार्ड भी मिले।

 

 

 

 

विवादों से भी नाता


स्मिता पाटिल सिनेमाई दुनिया में जीतनी चर्चित थीं उतनी ही पर्सनल लाइफ में भी। वे अपनी बढ़ती शोहरत के साथ-साथ विवादों के वजह से भी खूब चर्चा में रहीं। उन पर कई बार घर तोड़ने का भी आरोप लगाया जाता रहा है। कहा जाता है कि जब राज बब्बर के साथ उनकी नजदीकियां कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थीं तब मीडिया ने उनकी आलोचना करनी शुरू कर दी थी। क्योंकि उस समय राज की शादी नादिरा से हो चुकी थी। ऐसे में राज़ स्मिता के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चला रहे थे तो लोगों को नादिरा से सहानुभूति थी। बता दें कि राज बब्बर के दो बेटे हैं। उनकी पहली पत्नी नादिरा से आर्य बब्बर और स्मिता से प्रतीक बब्बर।

प्रतिक के जन्म समय मौत


स्मिता की लाइफ पर लेखिका मैथिलि राव ने एक किताब लिखीं। इस किताब के अनुसार स्मिता की मां स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते के ख़िलाफ़ थीं। उनका कहना था कि वो महिलाओं के अधिकार के लिए लड़ती रही तो उनकी बेटी स्मिता किसी और का घर कैसे तोड़ सकती है? हालाँकि राज बब्बर से अपने रिश्ते को लेकर स्मिता ने कभी मां की भी नहीं सुनी। प्रतीक के जन्म के कुछ घंटों बाद ही 13 दिसंबर 1986 को स्मिता का निधन हो गया। इस किताब के मुताबिक स्मिता को वायरल इन्फेक्शन की वजह से ब्रेन इन्फेक्शन हुआ था। वे प्रतीक के पैदा होने के बाद वो घर आ गई थीं। वो बहुत जल्द हॉस्पिटल जाने के लिए राज़ी नहींहोती थीं। यही वजह उनकी मौत का कारण बनी।

 

 

 

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